Due to lack of network, students are forced to climb three km daily for online class and study on the hill in goa | ऑनलाइन क्लास के लिए रोजाना तीन किमी की चढ़ाई करने को मजबूर स्टूडेंट्स, नेटवर्क की कमी होने के कारण पहाड़ी पर जाकर करते हैं पढ़ाई

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5 घंटे पहले

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कोरोनावायरस महामारी के कारण महीनों से बंद पड़े स्कूल-कॉलेज के कारण पढ़ाई को काफी नुकसान हो रहा है। ऐसे में पढ़ाई जारी रखने के लिए अब ऑनलाइन साधनों की मदद ली जा रही है। वहीं, गांवों और दूर-दराज के इलाकों में इंटरनेट या नेटवर्क के अभाव में बच्चों को पढ़ाई रखने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। लेकिन, परेशानी के बीच भी पढ़ाई जारी रखने के जुनून की एक कहानी गोवा में देखने को मिली। यहां स्टूडेंट्स का एक ग्रुप ऑनलाइन क्लास करने के लिए रोजाना तीन किलोमीटर की चढ़ाई कर पहाड़ी पर पहुंचता है।

25 स्टूडेंट्स वाले में कई लड़कियां भी

वन्यजीव अभ्यारण्य में स्थित इस पहाड़ी पर इंटरनेट कनेक्टिविटी काफी अच्छी मिलती है। 25 स्टूडेंट्स वाले में इस ग्रुप में ज्यादातर लड़कियां हैं। बीते कई महीनों से दक्षिण गोवा जिले के संगम तालुका में पहाड़ी पर चढ़ाई करना इन स्टूडेंट्स के डेली रूटीन का एक हिस्सा बन चुका है। स्टूडेंट्स इस रास्ते में आने वाले खतरों से भी नहीं घबराते। महामारी के कारण स्कूल-कॉलेज बंद होने के बाद से ही यह स्टूडेंट्स ऑनलाइन क्लासेस के जरिए अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं।

पहाड़ी पर अच्छे मिलते है सिग्नल

पणजी के दक्षिण में करीब 100 किमी की दूरी पर संगम तालुका के कुमारी और पात्रे जैसे गांव स्थित हैं। यहां के छात्र नेत्रावली वन्यजीव अभ्यारण्य में कुमार पहाड़ी पर नियमित तौर पर तीन किलोमीटर की चढ़ाई करते हैं, क्योंकि यहां पर उनके मोबाइल को सिग्नल अच्छे मिलते हैं और ऑनलाइन क्लासेस में कोई परेशानी नहीं आती। नीलिमा एकदो नामक एक स्टूडेंट ने बताया कि, ‘‘हम सुबह करीब आठ बजे यहां आते हैं और दोपहर एक बजे तक क्लासेस होने के बाद घर लौटते हैं।

समस्या दूर करने के लिए प्रयासरत है प्रशासन

गांवकर कॉलेज में पढ़ने वाली प्रविता कहती हैं कि यहां कई बार उनका सांपों से सामना हो जाता है, लेकिन ऑनलाइन क्लास करने के लिए यहां आना उनकी मजबूरी है। वहीं, जब जिला प्रशासन से इस बारे में पूछा गया तो एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इलाके में बीएसएनएल के सभी टॉवर सुचारू रूप से काम करें, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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